रांची, 29 अगस्त( हि.स.)। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि मंगलवार की रात को एक चौंकाने वाली घटना की जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि ज्ञात हुआ कि उत्पाद विभाग से एसीबी की ओर से भारी मात्रा में कागजात रात के अंधेरे में ले लाए गए। यह किसी भी प्रकार की सामान्य डे-टू-डे प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था, बल्कि पूरी तरह से गुप्त और संदिग्ध परिस्थितियों में अंजाम दिया गया। आश्चर्य की बात यह है कि यह पूरी कार्रवाई राज्य में अवैध रूप से पद पर बैठे डीजीपी के सीधे हस्तक्षेप और निगरानी में हुई। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर शुक्रवार को लिखा है कि अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिरकार एक ट्रक भरकर कागजात आधी रात को ही क्यों हटाए गए। क्या एसीबी और उत्पाद विभाग के भीतर किसी बड़े भ्रष्ट खेल की तैयारी चल रही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेेनपर निशाना साधते हुए कहा कि क्या यह कार्रवाई कुछ चुनिंदा अधिकारियों और राजनीतिक सरगनाओं को बचाने के लिए की गई है।
उन्होंने कहा कि हमारी जानकारी के अनुसार, यह कदम सीधे-सीधे महत्वपूर्ण साक्ष्यों को मिटाने और आने वाले समय में ईडी या सीबीआई की एंट्री से पहले जमीन तैयार करने का प्रयास प्रतीत होता है। यानी भ्रष्टाचार और घोटालों के सबूतों को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि राज्य की जनता के हितों की रक्षा करें और सुनिश्चित करें कि एक भी साक्ष्य नष्ट न हो। जनता यह जानने का हक रखती है कि—किसे बचाने के लिए यह खेल खेला जा रहा है और किसके इशारे पर सबूत मिटाए जा रहे हैं। क्या किसी भी विभाग के काग़ज़ात बिना फ़ोटो स्टेट करवाये और विधिवत विस्तारपूर्वक ज़ब्ती सूची बनवाये बिना रात के अंधेरे में गुप-चुप तरीक़े से उठाकर ले जाने का प्रावधान है। क्या यह मुख्यमंत्री की जानकारी और सहमति से हुआ है या नहीं।
उन्होंने कहा कि अख़बारों से यह भी पता चला कि पहले भी एसीबी वाले कुछ ऐसे फ़ाइल उठाकर ले गये हैं जिसके चलते अभी शराब दुकानों के अगले आवंटन में मुश्किल हो रही है और इस वजह से राजस्व की हानि संभावित है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से इस गंभीर मामले का संज्ञान लेने को कहा। बाबूलाल ने कहा कि इतिहास गवाह है कि चाहे चोर कितना भी चालाक और शातिर क्यों न हो, अंततः कोई न कोई सुराग ज़रूर छोड़ जाता है। यही सुराग एक दिन पूरे खेल को बेनकाब करेंगे।
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(Udaipur Kiran) / विकाश कुमार पांडे
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